Bookstruck

नींद उड़ गई!

गोपु नाम के एक घरेलू नौकर के घर बड़ी मन्नतों के बाद एक बेटा हुआ. उसने उसका नाम रामू रखा और उसे बहुत लाड़-प्यार से पाला. रामू जैसे-जैसे बड़ा होने लगा, वह अपने पिता के काम में मदद करने लगा. परंतु रामू को एक बहुत बुरी आदत लग गई थी. सूरज सिर पर आ जाने के बाद भी वह खर्राटे मारते हुए सोया रहता था. सोकर उठने के बाद ही वह अपने पिता के लिए खेत पर नाश्ता लेकर जा पाता था, उसके बाद ही वह काम शुरू करता था. गोपु को इस बात की बहुत खुशी होती थी कि उसका बेटा कंधे से कंधा मिलाकर काम करता है. लेकिन उसे यह चिंता भी सताती थी कि जो लड़का सुबह उजाला होने पर भी नहीं उठता, उसे कोई नौकर के काम पर क्यों रखेगा? "मेरे बाद मेरे बेटे का क्या होगा?" रामू सुबह जल्दी उठ जाए, इसके लिए गोपु ने बहुत कोशिश की, लेकिन सब बेकार गई. रामू अपने पिता की हर बात मानता था, पर सुबह जल्दी उठना उसके बस की बात नहीं थी. धीरे-धीरे गोपु के सामने यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि बेटे की यह आदत कैसे छुड़ाई जाए. उसने सोचा कि यदि रामू ने यह नींद नहीं छोड़ी, तो उसे सारी जिंदगी कष्ट झेलने पड़ेंगे. गोपु अक्सर अपने मन की यह बात अपने साले (रामू के मामा) को बताया करता था. एक बार गोपु को अपने मालिक के काम से दूसरे गाँव जाना पड़ा. इसलिए उसने रामू को उसके मामा के घर छोड़ दिया और अपने लौटने तक उसे संभालने को कहा. रामू अपने मामा के घर रहने लगा. तीसरे ही दिन मामा के घर तड़के चोरी हो गई. सवेरा होते ही मामा और मामी काम पर निकल गए थे और घर में रामू अकेला सो रहा था. मामा ने रामू से कहा, "सुबह-सुबह तेरे घर में होते हुए भी यह चोरी कैसे हो गई? ज़रूर यह चोरी तूने ही की होगी!" आस-पड़ोस के लोग भी कहने लगे कि चोरी रामू ने ही की होगी, भला दूसरा कौन करेगा? रामू ने बहुत सफाई दी कि उसे कुछ नहीं पता और वह सो रहा था, पर किसी ने उसकी बात नहीं मानी. लोगों को इस बात पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मज़दूरी कर के पेट पालने वाला कोई इंसान धूप निकलने तक सो सकता है. चोर कहे जाने के बाद से रामू को लगने लगा कि कब पिताजी वापस आएं और मैं उन्हें सारी सच्चाई बता दूँ. जब गोपु वापस आया और उसे पता चला कि उसके बेटे पर चोरी का आरोप लगा है, तो उसे बहुत गुस्सा आया. वह अपने साले से खूब लड़ा और फिर रामू को अपने साथ घर ले आया. अगले दिन जब गोपु उठा, तो रामू भी उसके साथ उठकर खड़ा हो गया. गोपु को बहुत आश्चर्य हुआ. उसने सोचा कि कहीं उसके साले ने रामू की यह बुरी आदत छुड़ाने के लिए ही तो वह चोरी का नाटक नहीं किया था? यह सोचकर उसने अपने साले का आभार माना. साले ने हँसते हुए कहा, "देखिए गोपु भाई! इस छोटी सी बात के लिए मुझे यह नाटक करना पड़ा. बचपन में यह सीख मिल गई तो ठीक है, वरना आगे जाकर बहुत मुश्किल होती!"